तुर्कमानपुर, गोरखपुर
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरियसी

* परिचय एवं उद्देश्य
* प्रवेश विवरणिका
* स्मृतियाँ
* आपके सुझाव

शिक्षण स्वरूप

इस संस्थान द्वारा हिन्दी माध्यम से भारतीय संस्कार युक्त समुचित शिक्षा विगत 24 वर्षों से योग्य एवम अनुभवी आचार्यों द्वारा प्रदान की जा रही है | कक्षा शिशु लव से अष्टम तक बालक एवम् बालिकाओं की सह-शिक्षा के अंतर्गत उनका विकास एवम मार्गदर्शन तथा शारीरिक एवम् सांस्कृतिक गतिविधियों पर ध्यान दिया जा रहा है |

चतुर्दिक विकास

हमारा लक्ष्य अत्यंत पुनीत और यज्ञ मयी है | इस पुनीत उद्देश्य की प्राप्ति एवम् छात्रों के चतुर्दिक विकास की दृष्‍टि से हम पंचमुखी शिक्षा व्यवस्था का पालन करते हैं | जो की निम्न प्रकार से हैं:-

  1. शारीरिक शिक्षा
  2. मानसिक शिक्षा
  3. व्यवसायिक शिक्षा
  4. नैतिक शिक्षा
  5. अध्यात्मिकशिक्षा

हम शिक्षा के निम्न पंचपदीय शिक्षण पद्धति का प्रयोग कर बच्चों में क्रियाशीलता के भाव व्यक्त करने की क्षमता, उचित-अनुचित, योग्य-अयोग्य का निर्णय लेने की क्षमता और वैचारिक विवेचना के भाव विकसित करने का प्रयास करतें हैं |

  1. अधिति कार्य (अध्ययन कार्य)
  2. बोध कार्य (कक्षा कार्य)
  3. अभ्यास (सह कार्य)
  4. प्रयोग (सहपाठ्य कार्य)
  5. प्रसार ( स्वाध्याय एवम प्रवचन)